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Showing posts from September, 2025

साका और जौहर

*साका और जौहर*  भारत के चमकते चेहरे का विश्व में गुणगान, ये शौर्य, ये त्याग—मेरा गौरव, मेरा अभिमान। आततायी के लिए तो लालच का था सामान, निकल पड़ा लश्कर लेकर निर्दयी अरमान। नरसंहार से थर्राई जन-जन की सांस, रक्तरंजित धरती पर बिखरी पीड़ा की आभास। पर राजपूताना के रणबांकुरे निकल पड़े, कवच, कुंडल, ढाल, तलवार लिए अडिग खड़े। रणभेरी बजी, गूंजा रणभूमि का शंख, हुआ युद्ध घमासान ,  वीरों ने किया बीस-बीस शत्रुओं का संहार अनंत। अंतिम लड़ाई शान और अभिमान की ठानी, स्त्रियों ने अस्मिता हेतु अग्नि में जौहर वरण की निशानी। मां-बहनों के पावन आशीष का तिलक लगाकर, निकल पड़े वीर रण में, प्राणों का दीप जलाकर। सिंह गर्जना कर घुस पड़े अरिदल के बीच, चमचमाती तलवारों से हुआ रुधिर का नीच। छपक-छपक कर गिरे असंख्य मुंड रण में, बलिदान लिख गया स्वर्णिम इतिहास क्षण-क्षण में। धरती की लाज बची, अस्मिता रही सलामत, साका के बलिदान से हुआ अमरत्व का वरदान। राजपूताना ने इतिहास अमिट बनाया, दुश्मन जीतकर भी अंततः हार गया, बलिदान की पराकाष्ठा देख नतमस्तक हुआ l           "विनोद निकुंभ "

मृगनैनी आंखों का दीदार

*🎶 गीत – मृगनैनी आँखों का दीदार 🎶*  मृगनैनी आँखों का दीदार हुआ, दिल रोके-रोके न रोके, अब सीमा से पार हुआ॥ चंद्रमुख सा कोमल चेहरा, गजरे से महके बाल, ओष्ठों की लालिमा छेड़े, प्रेमिल मधुर धमाल॥ मृगनैनी आँखों का दीदार हुआ॥ सुराही-सी कोमल गर्दन, रत्नजटित आभूषण, झूमे कर्ण झुमका लेकर, बेचैन हुआ मन॥ मृगनैनी आँखों का दीदार हुआ॥ चोली सजे सुहाग भरी, कमर बंधे करघनी, पतली काया लचक दिखावे, धड़कन गई बहकनी॥ दिल रोके-रोके न रोके, अब सीमा से पार हुआ॥ पायल की झंकार सुनाते, रन-झुन की मधुर तान, मदमस्त चाल अल्हड़ अंगन, छेड़े मन के गान॥ मृगनैनी आँखों का दीदार हुआ॥             "विनोद निकुंभ"               कविता  *मृगनैनी आँखों का दीदार रोके*  मृगनैनी आँखों का दीदार हुआ, दिल रोके-रोके न रोके, अब सीमा से पार हुआ॥ चंद्रमुख सा कोमल चेहरा, गजरे से सुसज्जित केश, ओष्ठों की लालिमा में डूबा चुंबन का हुआ प्रलय विशेष॥ मृगनैनी आँखों का दीदार हुआ॥ सुराही-सी लंबी गर्दन पर, रत्नजटित आभूषण का श्रृंगार, कर्ण झुके झुमके के बोझ तले, अंग-अंग हुआ बेक...

प्रेम शायरी

जुल्फों की घटाओ में मृगनैनी नक्श का दीदार हुआ,     घटा ऐसी बंधी बिन बादल के ही तपती धारा को जलधारा का प्यार मिला। मिट्टी की सुगंध सोंधी सोंधी है  क्योंकि बादल अभी वर्षा है । तुम्हारे का शहर का मौसम ,  हमारे शहर जैसा है।                   विनोद सांस के गीत को सांस गुन ले अगर आंखो की शीप से आंसू चुन ले अगर प्रेम का पूर्ण संवाद हो जायेगा मौन ने जो  कहा मौन सुने ले अगर            अंकिता सिंह See your hot beauty an air is blowing in the Heart. kisses of your lips has filled the fire in  the  Heart. घायल  है हम भी देखकर  तुम्हारी इस कातिल अदाओं को, चक्कर में न आयेंगे  तुम्हारी इन घनचक्करीअदाओं से।। दिल की ख्वाइशों को बंदिशों में क्या बांधना वो हमे मांग लेते हम तुम्हे मांग लेते।। तेरी जुल्फों की घटाओ में मन मोर बनकर नाच रहा है । तुम्हारे कपोलो की सुंदरता में तीखे नैन नक्श चांदनी की  की आभा बिखेर रहे है ।    मन बेहाल हो रहा है अधरो की धार से प्य...

पर्यावरण की पुकार

पर्वायवरण हूँ , क्यों करते  हो  परेशान ? तुम्हारा ही सेवक , तुम्हारा ही करता देखभाल I  प्रकृति के भंडार को , गर्भ में गृहित करता हूँ  अनाज से आक्सीजन तक , जन -जन तक पहुचता हूँ प्रदूषण से करू बचाव , जीवन को सफल बनता हूँ       तुम्हारा ही सेवक , तुम्हारा ही करता देखभाल I  आरी चलकर, मेरो पेड़ो को क्यों काटते हो , नाला बहाकर, नदियों को क्यों गन्दा करते हो , धुवाँ उड़ाकर, हवा में क्यों बिष घोलते हो , दुश्मनी है क्या , क्यों करते हो परेशान ,                       तुम्हारा ही सेवक , तुम्हारा ही करता देखभाल I मिट्टी मेरी सोना उगलती है , कदली चावल मेवे मिष्ठान, फल उपलब्ध कराती है I  रसायनो की रेलपेल से , उर्वरा शक्ति को क्षीण करते हो , दुश्मनी है क्या , क्यों करते हो परेशान ,                    तुम्हारा ही सेवक , तुम्हारा ही करता देखभाल I सम्भलो , जल्दी से सम्भलो , नहीं तो हो जाओगे बर्बाद , जीव के नाम पर कहानी सुनोगे , हरी भरी घास ,पानी को तरसोग...