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Showing posts from August, 2025

देश हमारा प्यारा सबसे , प्यारी मेरी धरती है

सदियों का इतिहास हमारा , प्रीत हमारी संस्कृति है  I  ऋषि -मुनियो का देश हमारा , पुराणो की कृति है I वेद हमारे विज्ञानं की भासा, मानवता हमारी संस्कृति है  I       देश हमारा प्यारा सबसे, प्यारी मेरी धरती है  I प्रेम हमारा जीवन दर्शन , न्याय हमारी नीति है  I  पूजन करते मानव ही नहीं , पत्थर पानी पौधों की भी स्तुति है I  बसुधैव् कुटुंबकम नारा हमारा , अतिथिl देवो भव  की रीती है I           देश हमारा प्यारा सबसे, प्यारी मेरी धरती है I मौसम मेरे प्यारे इतने , पुलकित करते रहते है I  जाड़ा  गर्मी  बरसात बसंत त्ररतुओ  के परिवर्तन है I  त्योहारो के मौसम , उमंग बिखरते रहे है I                 देश हमारा प्यारा सबसे, प्यारी मेरी धरती है  I हिन्दू हिंदुस्तान की सभ्यता, बौद्ध , जैन, सिख की धर्मस्थली है I  मुस्लिम, ईसाई, यहूदी  यहां की धर्मनिरपेक्ष  छवि है I  मिलकर हम सब हरदम गाये, हिंदुस्तान हमारा सब देशो से न्यारा है I प्रीत हमारा ...

🇮🇳 लोकतंत्र से जन्मा हूं 🇮🇳

      🇮🇳  लोकतंत्र से जन्मा हूं 🇮🇳 पूरा नहीं तो क्या आधा अवश्य खाता हूं। लोकतंत्र से जन्म हूं , विधायक एमपी कहलाता हूं। छः साल नहीं मिले तो तीन तीन साल ही राज चलाता हूं   ( J&K Cong & PDP) उग्रवादी भी सदस्य बन जाय तो भी नहीं शर्माता हूं । लोकत्रंता से जन्मा हूं, विधायक एमपी कहलाता हूं। पूरा न मिले  तो क्या आधा अवश्य खाता हूं। जन्मा था उत्तर पश्चिम कोने में पहुंच गया दक्षिण पश्चिम के कोने में (कर्नाटक  JDS & BJP) कुर्सी के लिए सांप्रदायिक धर्मनिरपेक्ष गठबंधन बनाता हुं कही का ईट कही का रोड़ा जोड कर भानुमती का कुनबा बनाता हूं , बिक न जाए विधायक राजधानी से दूर शहर का सैर कराता हूं।  पांच साल न मिले तो क्या  बीस बीस महीने ही राज चलाता हुं।  लोकतंत्र से जन्म हूं ।विधायक एमपी कहलाता हूं। पूरा न मिले तो क्या  आधा अवश्य खाता हूं। 2019 ,20 में जलवा दिखाया ,मध्य प्रदेश, कर्नाटक में । विधायको को खरीदा इस्तीफा दिलवाके , लोकतंत्र का अनूठा हथियार अजमा के , सरकार बनाई कर्नाटका और मध्य प्रदेश में, पांच साल नहीं मिला तो क्या,...

संसदीय लोकतंत्र और चुनाव

संसदीय लोकतंत्र और चुनाव                                   भारत में संविधान के अनुसार संसदीय  सरकार के गठन के लिए चुनाव की अवधारणा है । केंद्रीय सरकार एवम राज्य सरकार  के गठन के लिए  चुनाव  होते रहता  है , जोर शोर से चुनाव प्रचार होता है , केंद्र और राज्य का चुनाव विभिन्न  चरणों में चुनाव आयोग द्वारा कराया जाता है । प्रचार में इस संसदीय लोकतंत्र  की राजनीतिक पार्टियों द्वारा व्यक्ति विशेष आधारित एजेंडा सेट कर  नेता के नाम पर नेता को जैसे  केंद्र में  मोदीजी और राहुल गांधी को चुनने के लिए चुनाव हो रहा है इसी प्रकार  राज्यो के पार्टी के नेता के नाम पर चुनाव हो रहा है । चुनावी शोर गुल में संसदीय लोकतंत्र की अवधारणा  गाड़ियों की शोर और उड़ाए जा रहे धूल के नीचे ढक दिया गया है। लगता है सांसदों की महत्ता तो संविधानिक रूप से तो अवश्य होगी या है ,  मगर क्या वे व्यवहारिक रूप में अब  वे केवल कानून निर्माता न हो कर प्यादे ही गए है ।

फौजी भारतीय सीमा का रक्षक

जो फौजी कहलाता है   घर समाज से कोसो दूर , शांत वियावान में रहता है,  अथक परिश्रम से स्वच्छ निर्मल कुटियां बनाता है , देश सेवा की कसम में, चौबिस घंटे ड्यूटी पर रहता है , आतंरिक वाह्य विपति का, डटकर मुकाबला करता है I   जो फौजी कहलाता है I चिंता है उसे अपने बूढ़े माँ- बाप की, चिंता है उसे भाई- बहनो की पढाई की , चिंता है उसे बच्चो की परवरिश  की , चिंता है उसे बीबी की रुसवाई की , चिन्ताओ की अम्बार में,मनो-मस्तिष्क पर पूर्ण नियंत्रण रखता है I जो फौजी कहलाता है I महीनो -महीनो छुट्टी का इंतजार करता है  गिन गिन कर एक एक दिन गुजारता है,  क्रिसमस होली दिवाली ईद की तिथि देखता है , आ जाय आपदा, तो छुट्टी भूलकर , जन सेवा में लग जाता है I जो फौजी कहलाता है I प्रकृति का प्रेमी, अधिकतर पहाड़ो जंगलो में रहता है , नदी - नाले का पानी पी कर भी दिन गुजारता है, भारत  का प्रहरी  , दुश्मन को न घुसने देता है,  एक माँ के लिए, एक माँ को भूलता रहता है I जो फौजी कहलाता है I                           व...

नायिका का सौंदर्य

सागर के तट पर , सागर की लहरों से  आपका यू मिलना बहुत ही लाजवाब है , सागर की तरफ चलने की खबर से ही महबूबा की एक झलक पाने के लिए  गगन में बदल उमड़ने लगे, मयूर मदमस्त होकर नाचने लगे । पद्मावती चल रही ,आगे बढ रही आपकी खुशबू को पाकर रास्ते के पथर भी अपने को किर्तार्थ कर रहे है, प्रफुल्लित हो रहे है।   पद्मावती अपने मधुर मधुर कदम से आगे बढा रही , पायल की रुनझुन की ध्वनि मादक संगीत बिखेर रहे , सुनकर  मन मग्न है, ख्वाबों में है।   सागर के तट पर पहुंचकर ज्योही अपने घुंघराले केशो को  खोलती है तो लगता चन्द्र मुख के चारो तरफ काले नाग फन फैलाए सुरक्षा में खड़े है।   आपके एक स्पर्श के लिए सागर की लहरे बार बार तट को छूने का प्रयास कर रही है ,   यह आपका अति सुंदर  बिहंगाम दृश्य ❤️ को मोहित कर रहा है। सागर के लहरे उछल उछल  अठखेलियां कर नृत्य कर आपके स्वागत में इंद्रलोक की अप्सराओं की नृत्य सभा की रचना कर रही है । बूंदों को कपोलों पर आना मोतियों की लढिया बना रही है। इस अनुपम दृश्य को देखकर देवता भी  अभिभूत हो रहे है। अनुपम श्रृंगार की...

WELCOME WINTER

WINTER WINTER WELCOME WINTER, YOUR FEELING IS VERY THRILLING, COME SOON VANISH THE HIT OF HEAT, MAKE THE PLEASING MOMENT OF THE DAY, WINTER WINTER WELCOME WINTER. THIS YEAR WAS VERY FEAR, HOT TOO HOT MOMENT STOP, ALWAYS WAITING BLOWING AIR, NEITHER RAIN NOR MERCY SUMMER, WINTER WINTER WELCOME WINTER. IMAGINE YOUR PLEASING DAYS, LOVELY FEELING HIT OF HOT, ALWAYS WAITING RAYS OF SUN, PLAYING FUN IN THE WARM GOWN, WINTER WINTER WELCOME AGAIN .                                         VINOD NIKUMBH

बसंत का आगमन

बसंत का आगमन शरद का पलायन है I गुनगुनाती धूप में मस्ती का रोमांच है I  नव किसलय की झलक से , पेड़ मदमस्त है I  मंजरो की भीनी भीनी खुशबू का आभास है I आसमान का आँगन निर्मल ही निर्मल है I आकाश के मिलन से क्षितिज मदमस्त है I गुनगुनाती धुप में मस्ती का रोमांच है I बसंत का आगमन , शरद का पलायन है I पक्षियों का कलरव गगन की किलकारी है I अस्ताचल के उपरांत साँझ बेला की बरी है I घोसलों मे चोचो की चटचटाहट बसंत की देनदारी है I मदमस्त है खग भी मौसम का मिजाज है I गुनगुनाती धुप में मस्ती का रोमांच है I बसंत का आगमन , शरद का पलायन है I बूढ़े नवयुवको की टोलियां, निकल पड़ी ले कर पिचकारियाँ,  भिंगो रही सारिया रंग रही सल्वारिया  बसंत की महक में , हर यौवन मदमस्त है I मगर सीमा का प्रहरी , ड्यूटी में ब्यस्त है I गुनगुनाती धुप में मस्ती का रोमांच है I बसंत का आगमन , शरद का पलायन है I विनोद निकुंभ

न जी भर के देखा, न कुछ बात की.

न जी भर के देखा, न कुछ बात की. बड़ी आरज़ू थी, मुलाक़ात की.  कई साल से कुछ ख़बर ही नहीं, कहाँ दिन गुज़ारा, कहाँ रात की.  उजालों की परियाँ, नहाने लगीं, नदी गुनगुनाई, ख़यालात की.  मैं चुप था तो, चलती हवा रुक गई, ज़ुबाँ सब समझते हैं, जज़्बात की. सितारों को शायद, ख़बर ही नहीं, मुसाफ़िर न जाने, कहाँ रात की.      विनोद निकुंभ

मौसेरी बहने

उर्दू और हिंदी भारत भूमि की मौसेरी बहने ।  दोनो की जन्मस्थली भारत के गांव गलियों , चौक चौराहे पर हुआ ।  उर्दू गजलो , नज्मों, शेर शायरी में पिरोई गई वही हिंदी को दोहे , गीत  , लेख , सवैया, चौपाई, में कवियों और लेखकों ने  पंक्तिबद्ध किया। उर्दू जहां प्यार , प्रेम दिल की भाषा बनी वही हिंदी नम्रता , शिष्टाचार , सम्मान की भाषा बनी। दोनो का जब समिश्रण हुआ तो समाज में प्यार और शिष्टाचार ऐसे फला की गंगा जमुनी संस्कृति भारत में लहलहाने लगी ।  प्रेम और सम्मान का समाज में ऐसा आइना  विकसित हुआ कि उसको देखकर दूसरे भाषाई भी ललचाने लगे। जिस भाषा को पढ़कर समझकर , बोलकर हम प्यार, नम्रता, सम्मान का संदेश दे रहे थे उसी भाषा को आज के समाज के कुछ स्वार्थी , निजी हितों को पालने वाले तत्वों ने जहां उर्दू को जेहादी, हत्यारे , आतंकियों  की भाषा बना रहे है वही हिंदी का सबसे सम्मानित शब्द राम राम जो सत्य और सुकून अध्यात्म , दिल और मन का मान है उसको जय श्रीराम में परणीत कर उग्रता का रूप देने की नाकाम कोशिश किया जा रहा है।   जो शब्द दिल को प्रफुल्लित और मन को शांति प्रदान करत...