जो फौजी कहलाता है
घर समाज से कोसो दूर , शांत वियावान में रहता है,
अथक परिश्रम से स्वच्छ निर्मल कुटियां बनाता है ,
देश सेवा की कसम में, चौबिस घंटे ड्यूटी पर रहता है ,
आतंरिक वाह्य विपति का, डटकर मुकाबला करता है I
जो फौजी कहलाता है I
चिंता है उसे अपने बूढ़े माँ- बाप की,
चिंता है उसे भाई- बहनो की पढाई की ,
चिंता है उसे बच्चो की परवरिश की ,
चिंता है उसे बीबी की रुसवाई की ,
चिन्ताओ की अम्बार में,मनो-मस्तिष्क पर पूर्ण नियंत्रण रखता है I
जो फौजी कहलाता है I
महीनो -महीनो छुट्टी का इंतजार करता है
गिन गिन कर एक एक दिन गुजारता है,
क्रिसमस होली दिवाली ईद की तिथि देखता है ,
आ जाय आपदा, तो छुट्टी भूलकर , जन सेवा में लग जाता है I
जो फौजी कहलाता है I
प्रकृति का प्रेमी, अधिकतर पहाड़ो जंगलो में रहता है ,
नदी - नाले का पानी पी कर भी दिन गुजारता है,
भारत का प्रहरी , दुश्मन को न घुसने देता है,
एक माँ के लिए, एक माँ को भूलता रहता है I
जो फौजी कहलाता है I
विनोद निकुंभ
very nicely written
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