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बसंत का आगमन


बसंत का आगमन शरद का पलायन है I
गुनगुनाती धूप में मस्ती का रोमांच है I 
नव किसलय की झलक से , पेड़ मदमस्त है I 
मंजरो की भीनी भीनी खुशबू का आभास है I

आसमान का आँगन निर्मल ही निर्मल है I
आकाश के मिलन से क्षितिज मदमस्त है I

गुनगुनाती धुप में मस्ती का रोमांच है I
बसंत का आगमन , शरद का पलायन है I

पक्षियों का कलरव गगन की किलकारी है I
अस्ताचल के उपरांत साँझ बेला की बरी है I

घोसलों मे चोचो की चटचटाहट बसंत की देनदारी है I
मदमस्त है खग भी मौसम का मिजाज है I

गुनगुनाती धुप में मस्ती का रोमांच है I
बसंत का आगमन , शरद का पलायन है I

बूढ़े नवयुवको की टोलियां, निकल पड़ी ले कर पिचकारियाँ, 
भिंगो रही सारिया रंग रही सल्वारिया 
बसंत की महक में , हर यौवन मदमस्त है I
मगर सीमा का प्रहरी , ड्यूटी में ब्यस्त है I

गुनगुनाती धुप में मस्ती का रोमांच है I
बसंत का आगमन , शरद का पलायन है I

विनोद निकुंभ

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