सागर के तट पर , सागर की लहरों से आपका यू मिलना बहुत ही लाजवाब है ,
सागर की तरफ चलने की खबर से ही महबूबा की एक झलक पाने के लिए गगन में बदल उमड़ने लगे, मयूर मदमस्त होकर नाचने लगे ।
पद्मावती चल रही ,आगे बढ रही
आपकी खुशबू को पाकर रास्ते के पथर भी अपने को किर्तार्थ कर रहे है, प्रफुल्लित हो रहे है।
पद्मावती अपने मधुर मधुर कदम से आगे बढा रही , पायल की रुनझुन की ध्वनि मादक संगीत बिखेर रहे ,
सुनकर मन मग्न है, ख्वाबों में है।
सागर के तट पर पहुंचकर ज्योही
अपने घुंघराले केशो को खोलती है तो लगता चन्द्र मुख के चारो तरफ काले नाग फन फैलाए सुरक्षा में खड़े है।
आपके एक स्पर्श के लिए सागर की लहरे बार बार तट को छूने का प्रयास कर रही है ,
यह आपका अति सुंदर बिहंगाम दृश्य ❤️ को मोहित कर रहा है।
सागर के लहरे उछल उछल अठखेलियां कर नृत्य कर आपके स्वागत में इंद्रलोक की अप्सराओं की नृत्य सभा की रचना कर रही है । बूंदों को कपोलों पर आना मोतियों की लढिया बना रही है।
इस अनुपम दृश्य को देखकर देवता भी अभिभूत हो रहे है।
अनुपम श्रृंगार की देवी का स्वागतम सुस्वागतम।❤️
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