संसदीय लोकतंत्र और चुनाव भारत में संविधान के अनुसार संसदीय सरकार के गठन के लिए चुनाव की अवधारणा है । केंद्रीय सरकार एवम राज्य सरकार के गठन के लिए चुनाव होते रहता है , जोर शोर से चुनाव प्रचार होता है , केंद्र और राज्य का चुनाव विभिन्न चरणों में चुनाव आयोग द्वारा कराया जाता है । प्रचार में इस संसदीय लोकतंत्र की राजनीतिक पार्टियों द्वारा व्यक्ति विशेष आधारित एजेंडा सेट कर नेता के नाम पर नेता को जैसे केंद्र में मोदीजी और राहुल गांधी को चुनने के लिए चुनाव हो रहा है इसी प्रकार राज्यो के पार्टी के नेता के नाम पर चुनाव हो रहा है ।
चुनावी शोर गुल में संसदीय लोकतंत्र की अवधारणा गाड़ियों की शोर और उड़ाए जा रहे धूल के नीचे ढक दिया गया है। लगता है सांसदों की महत्ता तो संविधानिक रूप से तो अवश्य होगी या है , मगर क्या वे व्यवहारिक रूप में अब वे केवल कानून निर्माता न हो कर प्यादे ही गए है ।
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