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संसदीय लोकतंत्र और चुनाव

संसदीय लोकतंत्र और चुनाव                                   भारत में संविधान के अनुसार संसदीय  सरकार के गठन के लिए चुनाव की अवधारणा है । केंद्रीय सरकार एवम राज्य सरकार  के गठन के लिए  चुनाव  होते रहता  है , जोर शोर से चुनाव प्रचार होता है , केंद्र और राज्य का चुनाव विभिन्न  चरणों में चुनाव आयोग द्वारा कराया जाता है । प्रचार में इस संसदीय लोकतंत्र  की राजनीतिक पार्टियों द्वारा व्यक्ति विशेष आधारित एजेंडा सेट कर  नेता के नाम पर नेता को जैसे  केंद्र में  मोदीजी और राहुल गांधी को चुनने के लिए चुनाव हो रहा है इसी प्रकार  राज्यो के पार्टी के नेता के नाम पर चुनाव हो रहा है ।
चुनावी शोर गुल में संसदीय लोकतंत्र की अवधारणा  गाड़ियों की शोर और उड़ाए जा रहे धूल के नीचे ढक दिया गया है। लगता है सांसदों की महत्ता तो संविधानिक रूप से तो अवश्य होगी या है ,  मगर क्या वे व्यवहारिक रूप में अब  वे केवल कानून निर्माता न हो कर प्यादे ही गए है ।

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पिया , तूही मोर सजना हो

प्रिय ,तूही मोर सजना हो ,   तूही मोर प्राण हो l  आंखों की कजरा कहे  माथे की बिंदिया कहे  कानों की बाली,  बालों की गजरा कहे , मेरे सोलह श्रृंगार के  तूही मोर दर्पण हो ,  दिल के धड़कन हो  , तूही मोर सजना हो l प्रिय, तूही मोर प्राण हो l सच कह रही हूं ,  कुछ न चाही ,  यही मेरी इच्छा है l अखियां के सामने रहो  तूही मोर सजना हो,  तूही मोर प्राण हो  दिल के धड़कन हो l         जवाब  रानी तूही मोर खजाना हो तूही मोर हीरा रत्न  हो  रून झुन पायल बजे  सुन मोर मनवा सजे रतिया में आने वाली तूही मोर मीठा सपना हो l रानी , मेरी सजनी हो तूही मोर मीठा रत्न हो l अखियां नशीला लगे , फीका सब इसके आगे लगे , विनोद का सोचले , आखिर रमन हो सच कह रहा हूं रानी मोर खजाना हो हीरा रत्न हो l दिल की धड़कन हो l

"अमवा के मोजरा से रस टपके "

अमवा के मोजरा से रस टपके जैसे, वैसे ही तेरा प्यार दिल में घुले। तेरे होठों की लाली से मीठास बरसे, छू ले जो दिल को, ये एहसास खुले l  चाँद सा चेहरा, उजली सी धूप, तेरे बिना सूना लगे हर एक रूप। तेरी नज़र जब मुझसे मिलती, धीरे-धीरे धड़कन भी खिलती… तेरी खुशबू हवा में घुल जाए, हर पल तेरा नाम ही गुनगुनाए। तेरा स्पर्श जैसे कोई जादू, दिल को बना दे मीठा सा काबू l  अमवा के मोजरा से रस टपके जैसे, वैसे ही तेरा प्यार दिल में घुले। तेरे होठों की लाली से मीठास बरसे, छू ले जो दिल को, ये एहसास खुले l 

साका और जौहर

*साका और जौहर*  भारत के चमकते चेहरे का विश्व में गुणगान, ये शौर्य, ये त्याग—मेरा गौरव, मेरा अभिमान। आततायी के लिए तो लालच का था सामान, निकल पड़ा लश्कर लेकर निर्दयी अरमान। नरसंहार से थर्राई जन-जन की सांस, रक्तरंजित धरती पर बिखरी पीड़ा की आभास। पर राजपूताना के रणबांकुरे निकल पड़े, कवच, कुंडल, ढाल, तलवार लिए अडिग खड़े। रणभेरी बजी, गूंजा रणभूमि का शंख, हुआ युद्ध घमासान ,  वीरों ने किया बीस-बीस शत्रुओं का संहार अनंत। अंतिम लड़ाई शान और अभिमान की ठानी, स्त्रियों ने अस्मिता हेतु अग्नि में जौहर वरण की निशानी। मां-बहनों के पावन आशीष का तिलक लगाकर, निकल पड़े वीर रण में, प्राणों का दीप जलाकर। सिंह गर्जना कर घुस पड़े अरिदल के बीच, चमचमाती तलवारों से हुआ रुधिर का नीच। छपक-छपक कर गिरे असंख्य मुंड रण में, बलिदान लिख गया स्वर्णिम इतिहास क्षण-क्षण में। धरती की लाज बची, अस्मिता रही सलामत, साका के बलिदान से हुआ अमरत्व का वरदान। राजपूताना ने इतिहास अमिट बनाया, दुश्मन जीतकर भी अंततः हार गया, बलिदान की पराकाष्ठा देख नतमस्तक हुआ l           "विनोद निकुंभ "