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विश्वास का कोविड केयर कीट

विश्वास का कोविड केयर कीट जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है।
इस महामारी में आशा की किरण बन कर गांव की भोली भाली जनता का रक्षक बन रहे है ।
गावो की बेहाल जनता सड़कों दवा इलाज के लिए भटक रही है 
सूचना मिलते ही  विश्वास के साथी, वॉलंटियर ,अपना सीमित संसाधनों के बाद भी, सेवा में दौड़ पड़े है 
निरीह जनता में विश्वास के भाव भर रहे है 
विश्वास का कोविड केयर कीट जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है।

विश्वास के साथी सेवक गाजियाबाद के गावों से चलकर देवरिया, बहराइच , गोरखपुर, झांसी ग्वालियर ,कानपुर लखनऊ के गावों से होते हुए उत्तरांचल , मध्य प्रदेश , राजस्थान अब बिहार के गावों में अपना झोला ले पहुंच रहे है 
विश्वास का कोविड केयर कीट जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है

वालंटियर द्वारा स्थापित कोविड केयर सेंटर में सूचनाएं एकत्रित हो रही है , मरीजों के लिए बेड, ऑक्सीजन की व्यवस्था विश्वास के विश्वास से हो रहे है 
देर रात तक विश्वास विश्वास की घंटी बज रही है  
जनता की सेवा में  विश्वास के दोस्त , विश्वासी डॉक्टर, कारोबारी , छात्र , कवि गांव के प्रधान , सरपंच अपने संसाधनों से कर रहे है 
विश्वास का कोविड केयर कीट जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है।

जनता के चुने प्रतिनिधि विधायक, एमपी लॉकडाउन के नाम पर  जनता को भगवान भरोसे छोड़ 
अपने घरों में सो रहे है 
सरकार की सरकारी  स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग की दीवारें जर्जर हो खुद ही दवा के तरस रही  है 
रोगी उन्हें देख पहले  ही डर रहे है 
गांव का जनवासा, सामुदायिक केंद्र चलता फिरता अब स्वास्थ्य केंद्र बन रहे है 
विश्वास का कोविड केयर कीट जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है।

सेवको की सुध लेने को जनता सोच रही है मगर इनकी कान पे  अब भी न कोई जू रेंग रहे है 
मोटी चमड़ी के बने ये गैंडे कहते फिर रहे है चुनाव है क्या ,जो दौड़ने का वक्त हो रहा है , लॉकडॉउन है 
घूमना मना , सोने का यही तो वक्त मिल रहा है,
ले लेने दो सुध विश्वास को ये वक्त उन्हें दे रहे है 
विश्वास के सेवक हर हाल में बेहाल जनता तक 
पहुंच रहे है , 
गावो की जनता के लिए ,
डूबते के लिए तिनके का सहारा बन रहे है
विश्वास का कोविड केयर कीट जनता के विश्वास पर खरा उतर रहे है।
        विनोद कुमार "विनोद"




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